अफ़िया ने फोन उठाया और बोली, "I dey come, just give me five minutes।" उसके बगल में बैठी माँ ने भौंहें चढ़ाईं। "अफ़िया, तुम English और Twi एक साथ क्यों मिला रही हो? या तो पूरी English बोलो, या पूरी Twi।" अफ़िया मुस्कुराई नहीं। यही तो समस्या है। हर कोई उससे एक भाषा चुनने को कहता है, जबकि वह सोचती ही दोनों में मिलाकर है।
घाना में कोई भी "पूरी English" या "पूरी Twi" नहीं बोलता। हम "the market dey far" कहते हैं, "I'm coming now, себе wait" नहीं। हमारी बातचीत में English शब्द Twi के वाक्यों के बीच बैठते हैं, जैसे kelewele में मूंगफली। फिर एक वॉइस असिस्टेंट हमसे यह क्यों उम्मीद करता है कि हम पहले एक भाषा चुनें, फिर बोलना शुरू करें?
जब आपको बोलने से पहले एक भाषा चुननी पड़े
अकरा में भीड़-भाड़ वाला एक बाज़ार। कोजो के हाथ में दो प्लास्टिक के बैग, एक में टमाटर, दूसरे में ओरो। उसे अपनी माँ के लिए दवा लेनी है, लेकिन फार्मेसी का नाम याद नहीं। वह फोन निकालता है और वॉइस असिस्टेंट से कहता है, "Where is the pharmacy wey dey near the taxi rank?"
असिस्टेंट जवाब देता है, "I don't know what you mean. Please switch to English."
कोजो आह भरता है। उसने English ही तो बोली थी, लेकिन बीच में एक "wey" और एक "dey" घुस गया। उसकी माँ का इंतज़ार जारी है। वह दोबारा कोशिश करता है, इस बार धीरे-धीरे, "Which pharmacy is near the taxi rank?" जैसे वह कोई विदेशी हो। जवाब मिलता है, लेकिन कोजो के मन में यही रह जाता है कि उसका अपना ही उपकरण उसे अपनी ही भाषा में बात करने पर अजनबी समझता है।
क्या होता अगर असिस्टेंट उसे बीच में न रोकता? क्या होता अगर वह अपनी माँ से बात करने के अंदाज़ में ही बात कर पाता?
"Me I don chop" को समझना कोई विलासिता नहीं
यह सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं है। जब कोई उपकरण आपकी बोलचाल की भाषा नहीं समझता, तो वह आपको बताता है कि आपकी बोलने की आदत ग़लत है। आपको बदलना होगा। लेकिन कोड-स्विचिंग कोई ग़लती नहीं है, यह तो हमारी पहचान का हिस्सा है। "I no go fit come today" का मतलब साफ़ है। "I won't be able to come today" से ज़्यादा साफ़।
दूसरी ओर, जो असिस्टेंट सिर्फ "शुद्ध" भाषा समझते हैं, वे हमारे लिए नहीं बने हैं। वे उन लोगों के लिए बने हैं जो अपनी बातचीत में दो भाषाएँ नहीं मिलाते। हमारे लिए, वे एक ऐसे मेहमान की तरह हैं जो हमारे घर आकर बैठता है लेकिन हमारे खाने के तरीके पर सवाल उठाता है।
नकोमो इसलिए बनाया गया है ताकि आपको वैसे ही बोलने दिया जाए जैसे आप वाक़ई बोलते हैं। "Me I don chop, so I'll come after" जैसा वाक्य हमारे लिए पूरी तरह सामान्य है। इसे समझना कोई तकनीकी चमत्कार नहीं, बल्कि बुनियादी सम्मान है।
बोलने से पहले कोई फ़ॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं
पुराने वॉइस असिस्टेंट की सबसे बड़ी खामी यह है कि वे बातचीत की शुरुआत में ही एक शर्त रख देते हैं: पहले मुझे बताओ कि तुम कौन सी भाषा बोलोगे। लेकिन बातचीत ऐसे नहीं चलती। कोई भी यह नहीं सोचता कि "अब मैं 70% English और 30% Twi बोलूँगा"। आप बस बोलते हैं। असली बातचीत में कोई ड्रॉपडाउन मेनू नहीं होता।
नकोमो में आप टाइप कर सकते हैं या बोल सकते हैं, और जैसे ही आप बोलते हैं, वह आपको संभाल लेता है। टाइप करते समय भी यही बात लागू होती है: "I dey come" लिखना उतना ही स्वाभाविक है जितना कहना। और अगर आप हाथों से काम कर रहे हैं, या आपके हाथ में बैग हैं, तो वॉइस मोड में आप बोलना शुरू करते हैं, और अगर बीच में कुछ सुधारना हो, तो उसे टोक सकते हैं।
अफ़िया को आज वही बात याद आती है। जब उसने पहली बार नकोमो से कहा, "I don't know if the shop wey dey opposite the church still dey open", तो जवाब तुरंत मिला: "The one near the big mango tree? I think dem close by six, but you fit check." उसने सोचा, ऐसा तो मेरी बहन से बात करने जैसा लगा।
भाषा के बारे में नहीं, आपके बारे में
यह सिर्फ़ एक सुविधा नहीं है। यह इस बात का फ़ैसला है कि तकनीक आपकी आदतों को ढालती है या आपकी आदतों के हिसाब से ढलती है। जो उपकरण आपको बोलने से पहले एक भाषा चुनने पर मजबूर करता है, वह आपको बता रहा है कि आप जैसे बोलते हैं, वह ग़लत है। जो उपकरण आपको वैसे ही समझता है जैसे आप बोलते हैं, वह आपको बता रहा है कि आप जैसे हैं, वैसे ही सही हैं।
कोजो को आज वह बात याद है। अब जब वह अपने फोन से पूछता है, तो उसे यह नहीं सोचना पड़ता कि उसे अपनी भाषा बदलनी पड़ेगी। वह वही कहता है
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